हालांकि पूरे अधिनियम में 7 अध्याय और लगभग 50 धाराएं हैं, कुछ महत्वपूर्ण धाराएं इस प्रकार हैं:
देनदार को नोटिस दी जाती है कि वह 30 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज कर सकता है। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो सर्टिफिकेट फाइनल मान लिया जाता है। Poorly scanned OCR or automated translations can introduce
जब कोई व्यक्ति सरकारी बकाया नहीं चुकाता, तो कलेक्टर या प्राधिकृत अधिकारी एक प्रमाण-पत्र (Certificate) जारी करता है, जिसमे बकाया राशि का उल्लेख होता है। Poorly scanned OCR or automated translations can introduce
खंड 4: बकाये की मांग और प्रमाण पत्र जब कोई व्यक्ति सरकार को कोई धनराशि (जैसे भू-राजस्व, कर आदि) चुकाने में चूक करता है, तो संबंधित अधिकारी उसे देय राशि का 'प्रमाण पत्र' (Certificate) जारी करता है। इस प्रमाण पत्र में बकाया राशि और व्याज का विवरण होता है। Poorly scanned OCR or automated translations can introduce
खंड 7: प्रमाण पत्र का परिणाम प्रमाण पत्र जारी होने के बाद, यह एक 'डिक्री' (Decree) के समान माना जाता है, जो सिविल न्यायालय द्वारा पारित हो। इसका अर्थ यह है कि इस बकाये को लेकर अब साधारण सिविल कोर्ट में अलग से मुकदमा दायर करने की आवश्यकता नहीं होती, और वसूली की कार्रवाई सीधे इस प्रमाण पत्र के आधार पर शुरू हो जाती है।
खंड 8 से 11: वसूली के तरीके प्रमाण पत्र अधिकारी को वसूली के लिए व्यापक अधिकार प्राप्त होते हैं, जैसे:
खंड 36: अवरोध या रोक (Obstruction) यदि कोई व्यक्ति वसूली अधिकारी के काम में बाधा डालता है या झूठी बातें कहता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है।